ग्वालियर। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र का सागरताल और आनंद नगर इलाका इन दिनों कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। क्षेत्र में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं के बीच सागरताल चौराहे पर बनी पुलिस चौकी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सवाल सीधा है.. जब इलाके में असामाजिक तत्वों की आवाजाही की शिकायतें हैं, अपराध हो रहे हैं और लोगों की सुरक्षा चिंता का विषय बन रही है, तो चौकी पर पुलिस बल आखिर कहां है?
हाल ही में बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के आनंद नगर में 28 वर्षीय युवक विवेक मीणा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक युवक को गोली मारे जाने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
यह घटना अकेली चिंता नहीं है। सागरताल क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद सागरताल चौराहे पर बनी पुलिस चौकी पर नियमित पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
एक तरफ हत्या, दूसरी तरफ ATM पर वारदात की कोशिश
इसी क्षेत्र में हाल में एक युवक द्वारा ATM को निशाना बनाने की कोशिश की गई, जिसे पुलिस ने पकड़ लिया। यानी घटनाक्रम यह संकेत देता है कि अपराधी तत्व क्षेत्र में सक्रिय हैं और सार्वजनिक स्थान भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माने जा सकते।
ऐसे में सवाल यह है कि जिस जगह पर पुलिस की मौजूदगी सबसे ज्यादा दिखाई देनी चाहिए, वहां पुलिस चौकी खाली क्यों नजर आती है?
News InShorts ने पहले भी उठाया था सवाल
सागरताल चौराहे की पुलिस चौकी को लेकर News In Shorts पहले भी सवाल उठा चुका है। उस समय भी मुद्दा यही था कि चौकी बनाई गई है तो वहां पुलिसकर्मियों की नियमित मौजूदगी क्यों नहीं दिखाई देती?
अब क्षेत्र में गंभीर आपराधिक घटनाओं के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है।
चौकी आखिर किस उद्देश्य से बनाई गई है?
अगर चौकी सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है और मौके पर पुलिसकर्मी उपलब्ध नहीं हैं, तो फिर अपराध रोकने, तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराने और लोगों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करने की व्यवस्था कहां है?
बहोड़ापुर पुलिस की गश्त व्यवस्था पर भी सवाल
सागरताल और आसपास का क्षेत्र बहोड़ापुर थाने के अंतर्गत आता है। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग और पुलिस की दृश्य मौजूदगी कितनी है?
अपराध होने के बाद पुलिस मौके पर पहुंचना जरूरी है, लेकिन अपराध होने से पहले पुलिस की मौजूदगी और प्रभावी गश्त उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अगर किसी चौराहे पर पुलिस चौकी मौजूद है, तो आम नागरिक की स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि जरूरत पड़ने पर वहां पुलिस सहायता मिलेगी। लेकिन यदि चौकी ही बंद या खाली मिले, तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल—चौकी है तो पुलिसकर्मी कहां हैं?
सागरताल क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच अब पुलिस अधिकारियों को इन सवालों का जवाब देना चाहिए..
• सागरताल पुलिस चौकी पर कितने पुलिसकर्मी स्वीकृत हैं?
• वर्तमान में कितने पुलिसकर्मी वहां पदस्थ हैं?
• चौकी की ड्यूटी का रोस्टर क्या है?
• क्या चौकी पर 24 घंटे पुलिस की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है?
• क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त कितनी बार होती है?
• हत्या और अन्य आपराधिक घटनाओं के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बढ़ाई गई?
जनता को सिर्फ कार्रवाई नहीं, सुरक्षा का भरोसा चाहिए
हत्या जैसी गंभीर घटना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी जरूरी है, लेकिन कानून-व्यवस्था का असली पैमाना यह भी है कि आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करता है।
सागरताल चौराहे पर बनी पुलिस चौकी अगर वास्तव में जनता की सुरक्षा के लिए है, तो उसे बंद रखने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
अब देखना यह है कि बहोड़ापुर पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सागरताल की इस चौकी को लेकर क्या व्यवस्था करते हैं—चौकी में फिर से नियमित पुलिस बल दिखाई देगा या सवाल ऐसे ही अनुत्तरित रहेंगे? क्योंकि सवाल सिर्फ एक चौकी का नहीं है, सवाल सागरताल, आनंद नगर क्षेत्र की सुरक्षा का है।
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