लक्ष्मण तलैया पर 77 लाख के विकास कार्यों की जांच की मांग तेज, युवाओं के समर्थन में उतरे अधिवक्ता हिमांश, दस्तावेज़ जुटाकर हाई कोर्ट जाने की तैयारी

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Gwalior | Updated: 23 Jul 2026, 05:39 AM IST | 1 min read
लक्ष्मण तलैया पर 77 लाख के विकास कार्यों की जांच की मांग तेज, युवाओं के समर्थन में उतरे अधिवक्ता हिमांश, दस्तावेज़ जुटाकर हाई कोर्ट जाने की तैयारी
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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के वार्ड क्रमांक-33 स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मण तलैया के सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्यों को लेकर अब सवाल तेज हो गए हैं। करीब 77 लाख रुपये की लागत से कराए गए विकास कार्यों को लेकर क्षेत्र के कई युवाओं का कहना है कि मौके पर दिखाई देने वाले कार्य और खर्च की गई राशि में बड़ा अंतर प्रतीत होता है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भी तालैया की मौजूदा स्थिति को लेकर विभिन्न सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

क्षेत्रीय युवा राम लखन सिकरवार, सागर पांडे, हिमांशु सिकरवार, योगेश नामदेव, सूरज तोमर, आशु सेंगर, गोलू सिकरवार, कुणाल भदौरिया, पीयूष शर्मा, विवेक नामदेव और धीरू नामदेव सहित कई लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी राशि विकास कार्यों पर खर्च की गई है तो उसका परिणाम भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। उनका कहना है कि मौके पर दिखाई देने वाले कार्यों और स्वीकृत राशि के बीच अंतर प्रतीत होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर रखरखाव की कमी, अव्यवस्था और कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

 

इसी बीच अधिवक्ता हिमांश शर्मा ने कहा कि इस पूरे मामले को केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि कानून के दायरे में रहकर इसकी सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी सरकारी अभिलेख और तकनीकी दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे।

 

हिमांश शर्मा ने बताया कि सबसे पहले सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से विकास कार्य से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे जाएंगे। इनमें प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, टेंडर प्रक्रिया, वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका (Measurement Book), भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) तथा गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े दस्तावेज शामिल होंगे।

 

उन्होंने कहा कि इसके बाद मौके का निरीक्षण कर वर्तमान स्थिति के फोटो, वीडियो और अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे। यदि आवश्यकता पड़ी तो तकनीकी विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्वीकृत राशि के अनुरूप कार्य हुआ है या नहीं।

 

अधिवक्ता हिमांश शर्मा ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर नगर निगम, संबंधित विभाग, आयुक्त, कलेक्टर एवं अन्य सक्षम अधिकारियों को विधिवत शिकायत प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। यदि शिकायतों के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं होती है, तब मामले को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष कानून के अनुसार उठाने पर विचार किया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि यदि मामला हाई कोर्ट पहुंचता है तो अदालत से विकास कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण, वित्तीय ऑडिट तथा आवश्यकता पड़ने पर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की जा सकती है।

 

हिमांश शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि सभी कार्य नियमों के अनुसार और स्वीकृत राशि के अनुरूप हुए हैं, तो उसका भी स्वागत किया जाएगा। लेकिन यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होना जनहित में आवश्यक है।

फिलहाल लक्ष्मण तलैया के विकास कार्यों को लेकर उठे सवाल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग आरोपों की जांच करता है या नहीं और आगे इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

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