फ़िलहाल पत्रकारिता सिर्फ 2 फ़ीसदी वर्ग की आवाज़ बन गई है, 98 फ़ीसदी वर्ग को अपनी मीडिया तैयार करने की ज़रूरत- हेमंत चतुर्वेदी
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नीमच। कृति संस्था द्वारा आयोजित “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष विषयक संवाद कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार एवं पंजाब केसरी मध्य पदेश - छत्तीसगढ़ के संपादक हेमंत चतुर्वेदी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका तथा वर्तमान समय की चुनौतियों पर विस्तार से अपने विचार रखे।
हेमंत चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने देश को जागरूक करने और समाज को दिशा देने में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उन्होंने वर्तमान मीडिया व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज बड़ी संख्या में खबरें आमजन के मूल मुद्दों से दूर होती जा रही हैं। पत्रकारिता को निष्पक्षता, सामाजिक सरोकार और जनहित के मूल सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने आगे कहा कि आजादी के बाद भारतीय मीडिया अपने लिए एक स्वतंत्र और मजबूत राजस्व मॉडल विकसित नहीं कर सकी। अधिकांश मीडिया संस्थान विज्ञापनों और आर्थिक संसाधनों के लिए सरकारों तथा बड़े कॉरपोरेट घरानों पर निर्भर होते चले गए। इस आर्थिक निर्भरता का असर उनकी संपादकीय स्वतंत्रता पर भी पड़ा, जिसके कारण कई बार मीडिया को जनहित के मुद्दों से अधिक सत्ता और कॉरपोरेट से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देनी पड़ी। यही वजह है कि जो मीडिया पहले गांधी मीडिया थी वह अब गोदी मीडिया बन गई है..
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पत्रकारों को अपने दायित्वों को समझते हुए सकारात्मक एवं जनपक्षीय पत्रकारिता को प्राथमिकता देनी चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने हेमंत चतुर्वेदी के विचारों को प्रेरणादायक और मार्गदर्शक बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकारों ने की। इस अवसर पर पत्रकार, साहित्यकार, समाजसेवी एवं विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में संस्था की ओर से हेमंत चतुर्वेदीका शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया।