ग्वालियर में ₹77 लाख के विकास कार्य पर उठे गंभीर सवाल! लक्ष्मण तलैया की बदहाली पर युवाओं का फूटा गुस्सा, भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप
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ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर के वार्ड क्रमांक-33 स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मण तलैया एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह विकास नहीं बल्कि विकास कार्यों पर उठ रहे गंभीर सवाल हैं। करीब 77 लाख रुपये की लागत से कराए गए सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों को लेकर अब क्षेत्र के युवाओं ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि जिस राशि से विकास कार्य होने का दावा किया गया, उसका असर धरातल पर कहीं दिखाई नहीं देता।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें लक्ष्मण तलैया की मौजूदा स्थिति दिखाई जा रही है। वीडियो में कई स्थानों पर गंदगी, अव्यवस्था और रखरखाव की कमी नजर आती है। इन्हीं वीडियो के माध्यम से स्थानीय युवा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर करोड़ों की योजनाओं के बाद भी तालाब की यह स्थिति क्यों बनी हुई है।
क्षेत्रीय युवाओं राम लखन सिकरवार, सागर पांडे, हिमांशु सिकरवार, योगेश नामदेव, सूरज तोमर, आशु सेंगर, गोलू सिकरवार, कुणाल भदौरिया, पीयूष शर्मा (चिन्नू), विवेक नामदेव और धीरू नामदेव सहित कई लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में 77 लाख रुपये खर्च किए गए हैं तो उसका परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। उनका दावा है कि मौके पर जो काम नजर आ रहा है, वह खर्च की गई राशि के अनुपात में बहुत कम प्रतीत होता है।
युवाओं का कहना है कि विकास कार्यों के बाद जिस परिवर्तन की उम्मीद थी, वह दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि कार्य की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। कई युवाओं ने यहां तक कहा कि "विकास कार्य शुरू होने से पहले हमारी तलैया ज्यादा बेहतर दिखाई देती थी। उनका सवाल है कि यदि सरकार ने जनता की सुविधा के लिए राशि उपलब्ध कराई थी तो उसका पूरा लाभ क्षेत्र को क्यों नहीं मिला?
इस पूरे मामले में सबसे मुखर आवाज क्षेत्रीय युवा राम लखन सिकरवार की सामने आई है। वे लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो साझा कर रहे हैं और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति दिखाते हुए जवाब मांग रहे हैं। उनका आरोप है कि इस पूरे मामले में कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों और कथित युवा नेताओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उन्होंने दावा किया कि कई लोग इस मुद्दे पर इसलिए चुप हैं क्योंकि उन्हें लाभ पहुंचा है।
क्षेत्रीय युवाओं ने यह भी कहा कि यदि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराते हैं तो वे जल्द ही उन लोगों के नाम सार्वजनिक करेंगे, जिन पर उन्हें इस पूरे मामले में आर्थिक अनियमितता का संदेह है।
उधर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विकास कार्यों में वास्तव में लाखों रुपये खर्च हुए हैं तो उसकी तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और वित्तीय ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्वीकृत राशि के अनुसार कार्य हुआ या नहीं।
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय युवाओं द्वारा लगाए गए आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या नहीं।