जिससे कांपता था पूरा चंबल, वही 5 दिन तक क्यों रोता रहा? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान, पत्रकार विनोद ने खोल दिया सबसे बड़ा राज

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Local Desk | Updated: 26 Jul 2026, 06:34 PM IST | 1 min read
जिससे कांपता था पूरा चंबल, वही 5 दिन तक क्यों रोता रहा? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान, पत्रकार विनोद ने खोल दिया सबसे बड़ा राज
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भिंड। चंबल के बीहड़ों का नाम आते ही निर्भय गुर्जर की दहशत आज भी लोगों के जेहन में ताजा हो जाती है। लेकिन उसी निर्भय गुर्जर से जुड़ा एक ऐसा किस्सा भी सामने आया है, जिसे सुनकर शायद ही कोई यकीन करे। वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा, जिन्होंने करीब दो दशक पहले निर्भय गुर्जर का इंटरव्यू लिया था और 15 दिन निर्भय के साथ रहे थे, उन्होंने न्यूज इनशॉर्ट्स से बातचीत में बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब एक बच्चे से बिछड़ने के बाद निर्भय गुर्जर पांच दिनों तक रोता रहा और उसने खाना तक छोड़ दिया था।

 

7 साल के बच्चे का किया था अपहरण

 

विनोद शर्मा के मुताबिक, निर्भय गुर्जर ने इटावा के एक करीब 7 वर्षीय बच्चे का अपहरण किया था। फिरौती की रकम को लेकर परिवार और गिरोह के बीच कई महीनों तक सहमति नहीं बन सकी। इस वजह से वह बच्चा करीब आठ महीने तक निर्भय गुर्जर के साथ बीहड़ों में ही रहा।

 

अपने बच्चों की तरह रखता था साथ

 

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा बताते हैं कि लंबे समय तक साथ रहने के कारण निर्भय गुर्जर का उस बच्चे से भावनात्मक लगाव हो गया था। गिरोह के लोग भी बच्चे का ध्यान रखते थे और निर्भय उसे अपने बच्चे की तरह मानने लगा था। बीहड़ों की कठोर जिंदगी के बीच भी वह बच्चे के खाने-पीने और देखभाल का खास ख्याल रखता था।

 

फिरौती मिलने के बाद छोड़ा, लेकिन खुद टूट गया

 

कई महीनों बाद जब फिरौती की रकम पर सहमति बनी तो निर्भय गुर्जर ने बच्चे को उसके परिवार के हवाले कर दिया। विनोद शर्मा के अनुसार, बच्चे के जाने के बाद निर्भय पूरी तरह भावुक हो गया। उसने लगातार पांच दिनों तक रोया, किसी से ठीक से बात नहीं की और खाना तक छोड़ दिया था।

 

विनोद शर्मा बताते हैं कि निर्भय ने उनसे कहा था कि इतने लंबे समय तक साथ रहने के कारण वह बच्चे को अपने परिवार का हिस्सा मानने लगा था और उससे बिछड़ना उसके लिए आसान नहीं था।

 

आतंक और इंसानी भावनाओं का विरोधाभास

 

निर्भय गुर्जर पर हत्या, अपहरण, फिरौती और लूट जैसे दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे। उसके नाम से पूरा चंबल कांपता था और पुलिस वर्षों तक उसकी तलाश करती रही। लेकिन विनोद शर्मा का कहना है कि अपराध की दुनिया में रहने वाले इस शख्स के भीतर कभी-कभी ऐसी भावनाएं भी दिखती थीं, जिनकी लोग कल्पना भी नहीं कर सकते।

 

2005 में खत्म हुआ चंबल का बड़ा अध्याय

 

वर्ष 2005 में पुलिस मुठभेड़ में निर्भय गुर्जर मारा गया। उसकी मौत के साथ चंबल के बीहड़ों में आतंक का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया। हालांकि उसके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा का यह खुलासा भी उन्हीं घटनाओं में से एक है, जो निर्भय गुर्जर के व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने लाता है।

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