पुलिस FIR दर्ज नहीं करे तो क्या करें? जानिए BNSS की धारा 173 में आपके अधिकार

Kapil

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Gwalior | Updated: 01 Oct 2026, 05:36 PM IST | 1 min read
पुलिस FIR दर्ज नहीं करे तो क्या करें? जानिए BNSS की धारा 173 में आपके अधिकार
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नई दिल्ली। किसी व्यक्ति के साथ मारपीट, धोखाधड़ी, चोरी या कोई अन्य संज्ञेय अपराध होता है तो सबसे पहले वह पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश करता है। लेकिन कई बार शिकायतकर्ता को यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि घटना हमारे क्षेत्र की नहीं है या बाद में आना। ऐसी स्थिति में आम नागरिक को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

 

भारतीय नागरिकों को कानून ने शिकायत दर्ज कराने के लिए कुछ महत्वपूर्ण अधिकार दिए हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 इसी से संबंधित है।

 

क्या कहती है BNSS की धारा 173?

 

BNSS की धारा 173 के तहत संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस थाने में दी जा सकती है। इस प्रावधान की खास बात यह है कि अपराध की सूचना उस क्षेत्र की परवाह किए बिना दी जा सकती है जहां अपराध हुआ है। इसे आम भाषा में जीरो FIR की व्यवस्था कहा जाता है।

 

यानी यदि आपके साथ किसी दूसरे शहर या जिले में अपराध हुआ है, तो आप अपने नजदीकी पुलिस थाने में भी इसकी सूचना दे सकते हैं। पुलिस को कानून के अनुसार उस सूचना पर कार्रवाई करनी होती है और संबंधित थाने को मामला स्थानांतरित किया जा सकता है।

 

क्या FIR दर्ज होने के बाद उसकी कॉपी मुफ्त मिलती है?

 

हां। BNSS की धारा 173(2) के अनुसार, दर्ज की गई सूचना की एक प्रति सूचना देने वाले व्यक्ति या पीड़ित को तत्काल और निःशुल्क दी जाएगी।

 

इसलिए FIR दर्ज होने के बाद उसकी कॉपी मांगना आपका कानूनी अधिकार है।

 

अगर पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर दे तो क्या करें?

 

यदि थाना प्रभारी संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने से इनकार करता है, तो BNSS की धारा 173(4) के तहत शिकायतकर्ता लिखित रूप में संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) को अपनी शिकायत भेज सकता है।

 

यदि इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होती है, तो कानून में मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करने का रास्ता भी उपलब्ध है। BNSS की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट पुलिस जांच का आदेश दे सकते हैं। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक शर्तों का पालन करना होता है।

 

क्या हर शिकायत पर FIR दर्ज होना जरूरी है?

 

यह समझना भी जरूरी है कि हर पुलिस शिकायत पर FIR दर्ज होना अनिवार्य नहीं है। FIR मुख्य रूप से संज्ञेय अपराध की सूचना पर दर्ज की जाती है। असंज्ञेय अपराध के मामलों में अलग कानूनी प्रक्रिया लागू होती है।

 

BNSS की धारा 174 असंज्ञेय मामलों से संबंधित है। ऐसे मामलों में पुलिस निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शिकायत दर्ज करती है और मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना जांच नहीं कर सकती।

 

 आम नागरिक इन बातों का रखें ध्यान

 

* पुलिस थाने में शिकायत देते समय लिखित आवेदन की एक कॉपी अपने पास रखें।

* शिकायत जमा करने की प्राप्ति या अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

* FIR दर्ज होने पर उसकी निःशुल्क कॉपी प्राप्त करें।

* पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज नहीं किए जाने पर SP को लिखित शिकायत भेजें।

* आवश्यकता पड़ने पर अधिवक्ता की सलाह लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएं।

 

निष्कर्ष: कानून की जानकारी होना प्रत्येक नागरिक के लिए जरूरी है। पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने से लेकर न्यायालय तक अपनी बात रखने के लिए कानून ने नागरिकों को कई अधिकार दिए हैं। जरूरत है तो केवल इन अधिकारों को जानने और सही कानूनी प्रक्रिया अपनाने की।

 

विशेष सूचना: यह लेख सामान्य कानूनी जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी विशेष मामले में तथ्यों और परिस्थितियों के अनुसार अधिवक्ता से कानूनी सलाह लें।

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