आरोपी नहीं मिला तो 73 साल के दादा को थाने ले गई पुलिस, महिला वकील से भी की बदसलूकी

आरोपी नहीं मिला तो 73 साल के दादा को थाने ले गई पुलिस, महिला वकील से भी की बदसलूकी

मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले की कैलारस पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रेप का मामला पोते पर दर्ज हुआ, लेकिन पुलिस 73 वर्षीय बुजुर्ग दादा को घर से उठाकर थाने ले आई। आरोप है कि उन्हें करीब पांच घंटे तक थाने में बिठाकर रखा गया। बाद में महिला वकील के हस्तक्षेप के बाद देर रात उन्हें छोड़ा गया। पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है।

क्या है पूरा मामला?

परिवार के मुताबिक, कैलारस के तोड़िका गांव निवासी अरुण धाकड़ का एक युवती से चार साल से प्रेम संबंध था। दोनों परिवारों के बीच आना-जाना था और रिश्ता गंभीर हो गया। 7 अक्टूबर 2025 को दोनों ने ग्वालियर के आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद दंपती ने सुरक्षा की मांग को लेकर मुरैना एसपी कार्यालय में आवेदन भी दिया था।

शादी के बाद दर्ज हुआ रेप केस

आरोप है कि शादी के कुछ दिनों बाद युवती के परिजन उसे अपने साथ ले गए। 28 सितंबर की घटना का हवाला देते हुए युवती ने कैलारस थाने में अरुण के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया। एफआईआर में उल्लेख है कि होटल में दुष्कर्म किया गया और एक दोस्त ने वीडियो भी बनाया। गौर करने वाली बात यह है कि एफआईआर में दर्ज कथित घटना की तारीख शादी से सात दिन पहले की बताई गई है, जबकि शादी 7 अक्टूबर को हुई थी।

5 फरवरी को युवती की दूसरी शादी, 7 फरवरी को दादा को उठाया बताया जा रहा है कि रेप केस दर्ज होने के बाद युवती के परिजनों ने उसका विवाह राजस्थान में तय कर दिया और 5 फरवरी को शादी कर दी। इसी बीच 7 फरवरी को कैलारस पुलिस अरुण के घर पहुंची। अरुण नहीं मिला तो पुलिस उसके 73 वर्षीय दादा गोपाल सिंह धाकड़ को थाने ले गई। परिवार का आरोप है कि बुजुर्ग को बिना कारण बताए करीब पांच घंटे तक थाने में बैठाकर रखा गया।

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महिला वकील का आरोप—“हाईकोर्ट से पूछो

ग्वालियर हाईकोर्ट की अधिवक्ता अल्पना सिकरवार ने एसआई मनोज यादव पर अभद्रता का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि क्लाइंट के फोन पर वे कैलारस थाने पहुंचीं और बुजुर्ग को लाने का कानूनी आधार पूछा। आरोप है कि

एसआई ने जवाब देने के बजाय कहा—

“हाईकोर्ट से पूछो, मैं कारण बताने के लिए बाध्य नहीं हूं।”
वकील का यह भी आरोप है कि जब अन्य पुलिसकर्मी शांति से बात कर रहे थे तो एसआई ने तंज कसते हुए कहा—
“इनको तेल क्यों लगा रहे हो?”
यहां तक कि महिला पुलिस को बुलाकर गिरफ्तार करने की बात भी कही गई।

परिवार का दावा—दादा का पोते से संबंध नहीं
परिवार का कहना है कि गोपाल सिंह धाकड़ का अपने पोते से कोई लेना-देना नहीं है और उन्होंने सार्वजनिक रूप से अलग होने की सूचना भी जारी की है। इसके बावजूद उन्हें थाने लाकर बैठाना गैरकानूनी और मानसिक प्रताड़ना है।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

आरोपी की जगह परिजन को उठाना क्या कानूनसम्मत है?

बुजुर्ग को घंटों थाने में बैठाना किस आधार पर?

महिला वकील से कथित अभद्रता क्यों?

इन सवालों को लेकर पुलिस की भूमिका चर्चा में है। फिलहाल मामले को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रेप जैसे गंभीर मामले में जहां निष्पक्ष जांच अपेक्षित होती है, वहीं एक बुजुर्ग को थाने में बैठाए जाने और महिला वकील से कथित अभद्र व्यवहार के आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना होगा कि इस पूरे प्रकरण पर उच्चाधिकारियों द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं।

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