सागर ताल चौराहा बना बदमाशों का अड्डा, पुलिस चौकी पर लटका रहता है ताला, लोगों में आक्रोश

ग्वालियर। शहर का सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाका माने जाने वाला सागरताल चौराहा इन दिनों कानून व्यवस्था की खुली पोल खोल रहा है। जहां दिन-रात सैकड़ों वाहन और पैदल राहगीर गुजरते हैं, वही चौराहा अब बदमाशों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां हथियारों के साथ खुलेआम बदमाशी, गाली-गलौज और राहगीरों से मारपीट की घटनाएं आम हो चुकी हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग शाम ढलते ही इस रास्ते से गुजरने में डर महसूस कर रहे हैं।
चौकी मौजूद, लेकिन पुलिस नदारद
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सागरताल चौराहे पर पुलिस चौकी मौजूद है, लेकिन अधिकतर समय उस पर ताला लटका रहता है। लोगों का कहना है कि पुलिसकर्मी तभी दिखाई देते हैं जब किसी VIP मूवमेंट की सूचना होती है, बाकी समय चौकी सिर्फ नाम की रह गई है।
फोन करो तो घंटे बाद आती है पुलिस
न्यूज INSHORTS की टीम ने जब स्थानीय नागरिकों से बात की तो गुस्सा और निराशा साफ झलक रही थी। लोगों का कहना है कि बदमाशों की सूचना देने पर पुलिस को कई बार फोन किया जाता है, लेकिन एक घंटे या उससे ज्यादा समय बाद पुलिस मौके पर पहुंचती है, तब तक बदमाश फरार हो चुके होते हैं।
बहोड़ापुर थाना पुलिस पर गंभीर सवाल
सागरताल चौराहा बहोड़ापुर थाना क्षेत्र में आता है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाना पुलिस कुंभकरण की नींद सो रही है। न गश्त, न निगरानी और न ही बदमाशों में पुलिस का कोई खौफ दिखाई देता है।
चौकी सुरक्षा के लिए या खानापूर्ति के लिए?
अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि
क्या सागरताल की पुलिस चौकी सिर्फ खानापूर्ति के लिए बनाई गई है?
क्या चेकिंग के नाम पर आम लोगों को परेशान करना ही पुलिस की प्राथमिकता रह गई है?
जब चौराहा इतना व्यस्त है तो वहां एक भी सुरक्षा कर्मी तैनात क्यों नहीं रहता?
जनता बोली – अब भगवान भरोसे सुरक्षा
स्थानीय लोगों ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस से भरोसा उठ चुका है। उनका कहना है कि अब सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस नहीं, बल्कि ऊपर वाला ही निभा रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
जनता ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि –
सागरताल चौराहे पर स्थायी पुलिस बल तैनात किया जाए
चौकी को सक्रिय किया जाए
बदमाशों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो ताकि आम नागरिक बिना डर के इस मार्ग से गुजर सकें।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर स्थिति पर कब तक आंखें मूंदे बैठा रहता है, या फिर जनता की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाता है।
